स्वदेशी
स्वदेशी एक जीने की कला है जो भारत को विश्व की महाशक्ति बनने में एक बड़ा कदम साबित होगा सकती है । स्वदेशी का अर्थ है अपने देश का साम्मान करना और अपने आस पास बनने वाली वस्तुओं का प्रयोग करना । स्वदेशी की बात बिलकुल वैज्ञानिक है आइये जानते हैं केसे -
स्वदेशी के फायेदे -
1. देश में उत्पादन बढेगा और देश में उद्योग लगेगें
2. देश की जनता को रोजगार मिलेगा
3. अभी जो पैसा विदेश चला जाता है वो पैसा देश में ही रहेगा और देश के लोगों को मिलेगा
4. अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
5. जब देश की उत्पादकता बढ़ेगी तो चीजों (products) के मूल्यों में गिरावट आएगी और महंगाई कम होगी
स्वदेशी का उधाहरण -
घर - अगर आपकी कपड़ों की दूकान है तो क्या तब भी आप कपडे किसी और दूकान से खरीदोगे ....... नहीं ना, आप अपनी दूकान से कपडे खरीदोगे (घर के पैसे घर में )
गाँव - अगर आपके गाँव में आपकी कपड़ों की दूकान है और आपके गाँव वाले आपकी दूकान से कपडे ना खरीदकर इन्टरनेट से ऑनलाइन कपडे मंगवाले तो आपकी दूकानदारी को नुक्सान होगा ............ हेना, तो आप चाहोगे की आपके गाँव के लोग आपकी दूकान से कपडे खरीदें (गाँव के पैसे गाँव में )
देश - यही ऊपर का उधाहरण देश के लिए भी लागू होता है (देश के पैसे देश में )
वरीयता सूचि - preference list
आयत - import ---------- घर > गाँव > जिला > राज्य > देश > दुनिया
मतलब जब घर संपन्न बनेगा तो गाँव संपन्न बनेगा
जब गाँव संपन बनेगा तो जिला संपन बनेगा
जब जिला संपन बनेगा तो राज्य संपन बनेगा
जब राज्य संपन बनेगा तो देश संपन बनेगा
जब देश संपन बनेगा तो विश्व संपन बनेगा ----- इसी को व्यवस्था का विकेंद्रीकरण भी कह सकते हैं